वामनी दुर्गा पूजा (Vamani Durga Puja) का ऐतिहासिक मेला इस साल भी बड़े हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है। वामनी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित इस मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा फीता काटकर किया गया।
चांडिल, सरायकेला-खरसावां। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत वामनी गांव में विजयादशमी के पावन अवसर पर सदियों पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा के तहत भव्य मेले का आयोजन किया गया। यह दुर्गा पूजा राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही है और आज भी उसी ऐतिहासिक और पारंपरिक स्वरूप में आयोजित की जाती है। इस ऐतिहासिक पूजा का आयोजन प्रत्येक वर्ष सोलह आना कमेटी के तत्वावधान में किया जाता है, जिसमें गांव के सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
इस वर्ष भी मां दुर्गा की आराधना और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पूजा-अर्चना के साथ मेले में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था और दोपहर होते-होते पूरा मेला परिसर श्रद्धालुओं से भर गया।
राकेश वर्मा ने किया मेले का उद्घाटन
विजयादशमी के शुभ अवसर पर कोल्हान के प्रसिद्ध समाजसेवी राकेश वर्मा ने फीता काटकर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे देश के लोगों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने मां दुर्गा से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करने तथा समाज में सुख, शांति और भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की।
उद्घाटन समारोह के दौरान मेला कमेटी द्वारा समाजसेवी राकेश वर्मा का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्हें भगवा गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया।
संस्कृति हमारी पहचान – राकेश वर्मा
मेले के उद्घाटन के अवसर पर समाजसेवी राकेश वर्मा ने कहा कि वामनी गांव की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी ग्रामीण पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं। यह देखकर मन गदगद हो जाता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी ग्रामीण अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। हमारी संस्कृति, संस्कार और परंपराएं हमारी पहचान हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और सहयोग से यह ऐतिहासिक दुर्गा पूजा भविष्य में भी इसी श्रद्धा, भव्यता और पारंपरिक स्वरूप में आयोजित होती रहेगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित मेले में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए पारंपरिक नृत्य और भजनों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए आसपास के नीमडीह, चांडिल, कुकड़ू और ईचागढ़ प्रखंड के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। मां दुर्गा के दर्शन, मेले की चहल-पहल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिय ।
विजयादशमी मेले में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, हजारों की संख्या में पहुंचे लोग।

आयोजकों के अनुसार, मेले में लगभग 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता और वामनी गांव की दुर्गा पूजा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाया। मेले में बच्चों के लिए झूले, खिलौने और खान-पान के स्टॉल भी लगाए गए थे।
जनसहयोग से जीवंत है परंपरा
वामनी गांव की दुर्गा पूजा क्षेत्र की धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। इस आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से आपसी सद्भाव, भाईचारे और सामूहिक सहयोग की भावना मजबूत होती है।
कार्यक्रम में वामनी दुर्गा पूजा के मुख्य संरक्षक एवं नीमडीह के जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर सहित मेला कमेटी के सदस्य और सैकड़ों स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

Janta Ki Awaaz Live Jharkhand ki News web site hai

#nonfollewrs
Thanks