जिम्नास्टिक में पुरुलिया की ऐतिहासिक छलांग, 11 वर्षीय अंचिता ने राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में जीते दो कांस्य पदक
Purulia Anchita Nandi Gymnastics – पुरुलिया ने खेल के मैदान में इतिहास रच दिया है। महज 11 साल की उम्र में पहली बार राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में उतरी पुरुलिया सैनिक स्कूल की छात्रा अंचिता नंदी ने दो कांस्य पदक जीतकर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है।
इस शानदार प्रदर्शन के दम पर अंचिता ने जनवरी में होने वाली राष्ट्रीय विद्यालय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। यह पुरुलिया के विद्यालय जिम्नास्टिक इतिहास में पहली बार हुआ है।
पहली बार में ही दो पदक, नेशनल का टिकट पक्का
70वीं राज्य विद्यालय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप का आयोजन 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक साल्टलेक स्टेडियम और साई कैंपस में किया गया था। अंडर-14 वर्ग में रिदमिक जिम्नास्टिक की दो स्पर्धाओं में अंचिता ने कांस्य पदक अपने नाम किए।
अंचिता मूल रूप से हुगली की रहने वाली है और वर्तमान में पुरुलिया सैनिक स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ती है। उसके पिता अचिंत्य नंदी और मां बिपाशा नंदी ने इस सफलता का श्रेय प्रशिक्षक स्वर्णाली चक्रवर्ती को दिया है।
पुरुलिया के 4 खिलाड़ी टॉप-5 में, जिले का दबदबा
इस प्रतियोगिता में पुरुलिया का दबदबा रहा। अंचिता के अलावा 3 और खिलाड़ियों ने टॉप-5 में जगह बनाई। एक्रोबेटिक जिम्नास्टिक महिला पेयर में अनु राजवार और प्रीति राजवार ने चौथा स्थान हासिल कर स्टेट कैंप के लिए जगह बनाई। पुरुष पेयर वर्ग में रौनक महतो और अभ्रदीप अधिकारी पांचवें स्थान पर रहे।
जिला टीम के मैनेजर एबादुल हक हलदर (मयना) ने कहा कि छऊ नृत्य से जुड़े कलाकारों को जिम्नास्टिक के लिए प्रेरित कर राज्य स्तर तक पहुंचाना बड़ी उपलब्धि है। इस बार जिले के 14 जिम्नास्ट ने हिस्सा लिया था।
Purulia Anchita Nandi Gymnastics की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत
Purulia Anchita Nandi Gymnastics की ये सफलता रातों-रात नहीं मिली है। पुरुलिया में जिम्नास्टिक के लिए संसाधनों की काफी कमी है। सही मैट, उपकरण और कोच की कमी के बावजूद, प्रशिक्षक स्वर्णाली चक्रवर्ती ने लगातार मेहनत की। उन्होंने छऊ नृत्य से जुड़े बच्चों को चुना क्योंकि उनमें पहले से ही लचीलापन और संतुलन होता है। अंचिता ने रोज 4 से 5 घंटे तक अभ्यास किया। सुबह स्कूल और शाम को प्रैक्टिस, इसी अनुशासन ने उसे यह मुकाम दिलाया।
जिला टीम में पुरुलिया जिला जिम्नास्टिक एसोसिएशन के 12 खिलाड़ी शामिल थे और प्रशिक्षकों में विनय बाउरी, अशोक राजवार और पुष्पिता महतो भी शामिल रहे। जिला विद्यालय खेल परिषद के महासचिव किरीटी कुमार समेत सभी पदाधिकारियों ने इस सफलता पर बधाई दी है।
पुरुलिया अंचिता नंदी जिम्नास्टिक की इस कहानी से झारखंड और बंगाल के युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। सैनिक स्कूल की यह छात्रा रोज सुबह 5 बजे उठकर रियाज करती थी। कोच स्वर्णाली चक्रवर्ती ने बताया कि अंचिता में शुरू से ही अलग जुनून था। अब जनवरी में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में उससे गोल्ड की उम्मीद है। जनता की आवाज लाइव अपने पाठकों से अपील करता है कि इस बेटी को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट और शेयर करें ताकि पुरुलिया का नाम देश भर में रोशन हो सके।
पुरुलिया जिले के खेल प्रेमियों ने भी अंचिता की इस सफलता पर खुशी जताई है। सभी का कहना है कि अगर सरकार और प्रशासन मदद करे तो पुरुलिया से और भी कई अंचिता निकलेंगी। यह जीत आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
अब आगे क्या? नेशनल की तैयारी
अंचिता अब जनवरी में होने वाली राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता की तैयारी में जुट गई है। अगर वह वहां भी पदक जीतती है तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए चुनी जा सकती है। पुरुलिया के लिए यह गर्व की बात है। Janta Ki Awaaz Live की ओर से अंचिता और पूरी पुरुलिया टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।

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