मनरेगा में 3 लाख का गबन का एक बड़ा मामला सरायकेला जिले के नीमडीह प्रखंड से सामने आया है।
चांडिल / नीमडीह: सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड की चिंगड़ा-परकिडीह पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बड़े पैमाने पर सरकारी राशि के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जुगिलोंग गांव में तालाब से आंगनबाड़ी केंद्र तक मिट्टी-मुरम पथ निर्माण की योजना में लाखों रुपये की बंदरबांट का आरोप ग्रामीणों ने मुखिया, पंचायत सेवक, रोजगार सेवक, कनीय अभियंता और बिचौलियों पर लगाया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जिला उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
4.64 लाख की योजना, 3.01 लाख हजम करने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुगिलोंग गांव में मनरेगा मद से आंगनबाड़ी केंद्र तक मिट्टी-मुरम सड़क निर्माण के लिए कुल *4,64,725 रुपये* की योजना स्वीकृत की गई थी। योजना का उद्देश्य गांव के तालाब से आंगनबाड़ी तक एक मजबूत और ऊंची मिट्टी-मुरम सड़क बनाना था, ताकि बरसात के दिनों में भी ग्रामीणों, किसानों और बच्चों का आवागमन सुगम हो सके।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत राशि में से *3,01,572 रुपये* की राशि को पंचायत के जनप्रतिनिधि और कर्मियों ने आपस में मिलकर निकाल ली है। ग्रामीणों ने बताया कि योजना के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर पूरी राशि का गबन कर लिया गया है, जबकि धरातल पर काम नाममात्र का ही हुआ है।
धरातल पर नहीं हुआ काम, ट्रैक्टर से डाल दी गई थोड़ी मिट्टी
स्थानीय ग्रामीण और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस योजना में गांव के किसी भी जॉब कार्डधारी मजदूर को काम पर नहीं लगाया गया। मनरेगा का मूल उद्देश्य ही ग्रामीणों को रोजगार देना है, लेकिन यहां इस नियम की खुलेआम अनदेखी की गई।
ग्रामीणों के अनुसार, केवल तालाब से एक-दो ट्रैक्टर मिट्टी लाकर औपचारिकता के लिए सड़क पर डाल दी गई। सड़क पर पर्याप्त मुरम और मिट्टी नहीं डाली गई, न ही उसकी समतलीकरण और मजबूती का कोई काम किया गया। नतीजतन, सड़क आज भी कच्ची, गड्ढों भरी और अधूरी पड़ी है। थोड़ी सी बारिश में ही सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे चलना मुश्किल हो जाता है।

किसानों की लाइफ लाइन है यह सड़क
यह सड़क जुगिलोंग गांव के किसानों के लिए लाइफ लाइन मानी जाती है। इसी रास्ते से बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, धान रोपनी के लिए मजदूर और आंगनबाड़ी जाने वाले छोटे बच्चे गुजरते हैं। खेतों से फसल को घर तक लाने के लिए यही एकमात्र रास्ता है। सड़क के अधूरे निर्माण के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान की इस खेती के सीजन में आवागमन बाधित होने से किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है।
योजना कहीं की, काम कहीं और, कागज पर पूरा
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि योजना का नाम कहीं और का है और काम कहीं दूसरी जगह पर दिखाया गया है। आरोप है कि मापी-पुस्तिका (MB) में गलत माप दिखाकर और फर्जी मस्टर रोल भरकर योजना को कागजों पर पूर्ण बता दिया गया है और राशि की निकासी कर ली गई है। जब ग्रामीणों ने मनरेगा की वेबसाइट पर योजना की स्थिति देखी तो उसमें काम को पूरा (Completed) दिखाया गया है, जबकि हकीकत में सड़क आज भी अधूरी है।


जिला प्रशासन से जांच की मांग
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन और प्रखंड विकास पदाधिकारी से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि इस योजना की भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराई जाए, मस्टर रोल में जिन मजदूरों के नाम हैं, उनसे पूछताछ की जाए और दोषी पाए जाने पर मुखिया, पंचायत सेवक, रोजगार सेवक और कनीय अभियंता पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और गबन की गई राशि की वसूली की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस तरह के भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं गांव तक पहुंचने से पहले ही कागजों में दम तोड़ देंगी।
डिस्क्लेमर : यह खबर नीमडीह प्रखंड के जुगिलोंग गांव के ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों, सोशल ऑडिट के दस्तावेजों (Form 2A/2B) और GPS तस्वीरों के आधार पर प्रकाशित की गई है। ‘जनता की आवाज Live’ इस खबर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। इस संबंध में संबंधित पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया है। यह खबर जनहित और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। यदि किसी के पास इससे संबंधित कोई तथ्य या साक्ष्य है तो वह हमसे संपर्क कर सकता है।
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