
अभिजीत गोराई, चांडिल: चांडिल डैम का जलस्तर आज शाम 4 बजे 181 RL मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से डैम प्रभावित क्षेत्र के कई गांवों के खेतों में कमर भर पानी घुस गया है, जिससे धान सहित अन्य फसलों के बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार कुकड़ू प्रखंड के बांदाबीर, केंदाआन्दा, आदारडीह, चौका, कारकीडीह, चानो, चोराटखाल, नीमडीह प्रखंड के हुटू, आंडा, तिलाईटांड़, कल्याणपुर, लावा, सीमा, चांडिल प्रखंड के रसुनिया, हाथीनादा, रूयानी, पियालडीह, बोराबिंदा, केशरगड़िया, डिमुडीह तथा ईचागढ़ प्रखंड के दियाडीह, रुगड़ी, खोकरो, मैसाढ़ा, गाराडीह, मातकमडीह, लोपसोडीह, छोटा आमड़ा, हुटुप, ईचागढ़, पातकुम और हूरलूंग सहित दर्जनों गांवों के खेतों में पानी घुसने की सूचना है।*विस्थापित अधिकार मंच ने जताई चिंता*विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि किसानों ने महीनों की मेहनत से धान की फसल तैयार की है, लेकिन समय रहते जलस्तर का प्रबंधन नहीं हुआ तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।उन्होंने कहा कि विस्थापितों ने विकास के लिए अपनी जमीन दी है, इसलिए उनकी फसल और आजीविका की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विस्थापितों का आरोप है कि गंभीर स्थिति में भी मुख्य अभियंता और कार्यपालक अभियंता से संपर्क नहीं हो पाता, ऐसे में किसानों की सुनेगा कौन?राकेश महतो ने सवाल उठाया कि एक तरफ परियोजना को पुरस्कार मिल रहे हैं, दूसरी तरफ उसी परियोजना के हजारों विस्थापितों के खेत डूब रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना की सफलता का पैमाना सिर्फ पुरस्कार हैं या विस्थापितों की फसल, पुनर्वास और आजीविका भी।

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