नीमडीह से हमारे संवाददाता की रिपोर्ट।
कठपुतली की अठखेलियों से छऊ के रोमांच तक, लोककलाओं ने मोहा मन
Focus: Jharkhand Living Heritage Festival 2026 Nimdih, Ketunga School Maidan
नीमडीह, सरायकेला-खरसावां : नीमडीह प्रखंड के केतुंगा मध्य विद्यालय मैदान में आयोजित तीन दिवसीय Jharkhand Living Heritage Festival 2026 के दूसरे दिन शनिवार को लोकसंस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कठपुतली नृत्य की मनमोहक अदाओं से लेकर खरसावां और मानभूम छऊ नृत्य के रोमांच तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर खींचे रखा। पूरा मैदान झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रंगों में रंगा हुआ नजर आया।


केतुंगा मध्य विद्यालय मैदान में छऊ नृत्य प्रस्तुति के दौरान उमड़ी ग्रामीणों की भीड़। (फोटो: जनता की आवाज लाइव)
यह महोत्सव कॉन्टैक्ट बेस (Contact Base) और बांग्लानाटक डॉट कॉम (BanglaNatak.com) की ओर से एक्सिस बैंक फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड की लुप्त होती लोककलाओं को मंच देना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि डिजिटल युग में हमारी लोककलाएं कहीं खो न जाएं, इसलिए उन्हें सहेजना और प्रचारित करना बेहद जरूरी है।
कठपुतली नृत्य ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार रंजन राय एवं उनकी टीम द्वारा की गई। जैसे ही मंच पर रंग-बिरंगी कठपुतलियां आईं, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की निगाहें वहीं टिक गईं। कठपुतलियों की भाव-भंगिमा, लयबद्ध संचालन और हास्य-व्यंग्य से भरपूर रोचक अंदाज ने सभी का दिल जीत लिया। कलाकारों ने पौराणिक कथाओं और सामाजिक संदेशों को कठपुतलियों के माध्यम से इतने सजीव तरीके से प्रस्तुत किया कि दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। नीमडीह जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह की कला को देखना ग्रामीणों के लिए एक नया अनुभव था।
खरसावां और मानभूम छऊ ने किया मंत्रमुग्ध
इसके बाद बारी थी झारखंड के विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य की। सबसे पहले नंदलाल कुम्हार के नेतृत्व में कलाकारों ने खरसावां छऊ नृत्य की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने आकर्षक मुखौटे और पारंपरिक वेशभूषा धारण कर रखी थी। ढोल, धमसा और महुरी की थाप पर जब कलाकारों ने सधे हुए कदमों और शारीरिक भाव-भंगिमाओं के साथ युद्ध और प्रेम की कहानियों का मंचन किया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इसके ठीक बाद कार्तिक कर्मकार के नेतृत्व में मानभूम छऊ नृत्य की टोली ने मंच संभाला। मानभूम छऊ अपनी तेज गति, उछाल और जोशीली प्रस्तुति के लिए जाना जाता है। बिना मुखौटे के चेहरे के हाव-भाव से ही भावनाओं को व्यक्त करने की इस शैली ने दर्शकों को अलग ही रोमांच से भर दिया। दोनों शैलियों की विशिष्टता ने यह साबित कर दिया कि छऊ सिर्फ एक नृत्य नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा है।
हजारों ग्रामीणों की रही उपस्थिति
महोत्सव के दूसरे दिन दर्शकों की भीड़ पहले दिन से भी अधिक थी। नीमडीह, केतुंगा, टिसरी, मुरुडीह समेत आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग पहुंचे थे। मैदान में लगाई गई कुर्सियां कम पड़ गई थीं और लोग जमीन पर बैठकर भी कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहे थे। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से हमारे बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में जानने का मौका मिलता है।
इस अवसर पर बांग्लानाटक डॉट कॉम के प्रमुख अमिताभ भट्टाचार्य, उस्ताद परेश कुमार, डॉ. पूर्णचंद्र कुमार, संपर्क बेस के प्रतिनिधि समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रबीर कुमार बनर्जी ने किया। आयोजकों ने बताया कि रविवार को फेस्टिवल का अंतिम दिन है, जिसमें झूमर, पाता नृत्य और कई अन्य जनजातीय कलाओं की प्रस्तुति की जाएगी।
इस Jharkhand Living Heritage Festival 2026 Nimdih महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य झारखंड की लुप्त हो रही लोककलाओं को संरक्षित करना है।
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