
चांडिल (सरायकेला-खरसावां): चांडिल प्रखंड के रुसुनिया गांव में इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से ग्रामीणों में भय का माहौल है। हाथियों का झुंड लगातार खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस पहल जमीन पर नहीं कर रहा है।
रुसुनिया निवासी अजय महतो ने दलमा गज परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, फिर भी हाथियों का दलमा में स्थायी ठहराव नहीं हो पा रहा है।
“अगर करोड़ों खर्च करने के बाद भी हाथी दलमा से बाहर निकलकर गांवों और खेतों में घुस रहे हैं, तो परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।” – अजय महतो
बताया गया कि रुसुनिया गांव दलमा वन क्षेत्र से महज 9-10 किलोमीटर की दूरी पर है, इसके बावजूद हाथियों के आने-जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। ग्रामीणों को रात भर जागकर अपने खेतों और घरों की रखवाली करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे दोहरी समस्या से जूझ रहे हैं। एक तरफ चांडिल डैम के पानी से जुड़ी परेशानियां हैं, तो दूसरी तरफ हाथियों का आतंक।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- हाथी प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और गश्त बढ़ाई जाए।
- हाथियों को गांव में घुसने से रोकने के लिए वैज्ञानिक और स्थायी उपाय किए जाएं।
- फसल नुकसान का मुआवजा किसानों को समय पर दिया जाए।
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है और कहा है कि योजनाओं के धरातल पर असर की समीक्षा होनी चाहिए।

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