dalma eco zone tulin jamin vivad:

रिपोर्टर: संजय के गोराई, चांडिल/सरायकेला-खरसावां
चांडिल/सरायकेला-खरसावां: जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत चिलगु पंचायत के तुलिन गांव में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और चारदीवारी निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। dalna eco zone tulin jamin vivad को लेकर ग्रामीणों ने कुछ बाहरी व्यक्तियों पर रैयती जमीन की आड़ में बिहार सरकार की जमीन को भी घेरकर चारदीवारी निर्माण कराने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला दलमा वन्यजीव अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के तराई क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यह और भी संवेदनशील हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तुलिन गांव दलमा पहाड़ की तराई में बसा हुआ है, जो पर्यावरण की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां बड़ी मात्रा में बिहार सरकार के नाम पर दर्ज जमीन मौजूद है, जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामीण पूजा-पाठ और सामुदायिक कार्यों के लिए करते आ रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां तेजी से चारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है, जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
dalma eco zone tulin jamin vivad ग्रामसभा में उठा मामला, बाहरी लोगों पर लगे आरोप
इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को तुलिन गांव में एक विशेष ग्रामसभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण शामिल हुए। साथ ही आसपास के विभिन्न गांवों से मांझी बाबा और ग्राम प्रधानों को भी आमंत्रित किया गया था, ताकि इस विवाद का सामाधान निकाला जा सके।
ग्रामसभा के लोगों का कहना है कि गांव में कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा रैयती जमीन खरीदी गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें रैयती जमीन की खरीद-बिक्री से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आरोप है कि इसके साथ वर्षों से ग्रामीणों के पूजा-पाठ के लिए इस्तेमाल की जा रही बिहार सरकार की जमीन को भी चारदीवारी के अंदर घेर लिया गया है। यह जमीन गांव के मांझी थान और जाहेर थान से सटी हुई बताई जा रही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर सरकारी जमीन पर चारदीवारी का निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है? क्या इसके लिए अंचल कार्यालय या वन विभाग से कोई अनुमति ली गई है? ग्रामीणों ने आशंका जताई कि रैयती जमीन की आड़ में सरकारी जमीन पर भी कब्जा करने का सुनियोजित प्रयास किया गया है।
कब्जाधारी ने दिया आश्वासन, पूजा स्थल होगा शिफ्ट
बैठक के दौरान उस व्यक्ति ने भी अपना पक्ष रखा, जिसके दखल में उक्त सरकारी जमीन होने की बात सामने आई। उसने ग्रामसभा को बताया कि वह जमीन दूसरे पक्ष को दे चुका है और पूजा स्थल को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। उसने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा।
इसके बाद ग्रामसभा में आपसी सहमति से पूजा स्थल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि वे विवाद नहीं चाहते, लेकिन अपनी परंपरा और पूजा स्थल को बचाए रखना चाहते हैं।
सबसे बड़ा सवाल: इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण की अनुमति किसने दी?
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल दलमा इको-सेंसिटिव जोन में हो रहे कंक्रीट निर्माण को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है, तो यहां ईंट की ऊंची-ऊंची चारदीवारी निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
नियमों के अनुसार इको-सेंसिटिव जोन में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण से पहले वन विभाग और पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या संबंधित विभाग से इसकी अनुमति ली गई है? यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है, तो अब तक अंचल प्रशासन और वन विभाग द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि खुले मैदान में सैकड़ों फीट लंबी चारदीवारी खड़ी की जा रही है, जो दलमा की जैव विविधता और हाथियों के आवागमन वाले कॉरिडोर के लिए खतरा बन सकती है।
dalna eco zone tulin jamin vivad को लेकर ग्रामीणों ने की जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और चांडिल अंचलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है, उसकी मापी कराई जाए और बिहार सरकार की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
साथ ही वन विभाग से भी मांग की गई है कि दलमा इको-सेंसिटिव जोन के नियमों का उल्लंघन कर हो रहे निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए।
फिलहाल ग्रामसभा में पूजा स्थल को स्थानांतरित करने पर सहमति बनी है, लेकिन सरकारी जमीन पर चारदीवारी निर्माण और दलमा इको-सेंसिटिव जोन के नियमों को लेकर सवाल बरकरार हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित प्रशासन और वन विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
तस्वीर में: तुलिन गांव में बन रही चारदीवारी, पीछे दलमा पहाड़।
और पढ़ें: Chandil News
सरकारी जानकारी: Seraikela Official Website

Janta Ki Awaaz Live Jharkhand ki News web site hai
