Chandil Kurli Adivasi Jameen Vivad ne ek baar phir tool pakad liya hai. Chandil ke Kurli gaon me Adivasi ki zameen par avaidh kabza ka aarop laga hai…
चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल में एक बार फिर आदिवासी जमीन विवाद ने तूल पकड़ लिया है। चौका थाना क्षेत्र अंतर्गत खूंटी पंचायत के कुरली गांव में आदिवासी रैयत की जमीन को अवैध तरीके से हड़पने का मामला सामने आया है। कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को चांडिल प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
जय मंगला कंपनी पर लगे गंभीर आरोप
मामला कुरली स्थित मेसर्स जय मंगला स्पंज आयरन प्रा. लि. कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी प्रबंधक द्वारा गांव के आदिवासी रैयत सनाराम माझी की निजी रैयती जमीन को गैर-कानूनी तरीके से अपने कब्जे में ले लिया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कंपनी ने उनकी जमीन की मेड़ को जेसीबी से समतल कर दिया, जमीन पर लगी पलाश के पेड़ों को काट दिया और जबरन चारदीवारी का निर्माण कर दिया।
इस घटना से पूरे कुरली गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि चांडिल क्षेत्र सीएनटी/एसपीटी एक्ट के तहत संरक्षित है, जहां आदिवासियों की जमीन पर किसी भी प्रकार के उद्योग के लिए गलत तरीके से अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, फिर भी कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, उबले ग्रामीण
पीड़ित परिवार द्वारा इस संबंध में 16 अक्टूबर 2026 को चांडिल अंचल अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत की प्रतिलिपि उपायुक्त सरायकेला-खरसावां, भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) चांडिल, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चांडिल और झारखंड सरकार को भी भेजी गई थी। लेकिन संघ का आरोप है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया।
FIR दर्ज करने से इनकार का आरोप, थाना पर भी सवाल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात चौका थाना की भूमिका को लेकर सामने आई है। झारखंड श्रमिक संघ का आरोप है कि जब पीड़ित पक्ष 21 अक्टूबर को चौका थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने गया, तो थाना में मौजूद मुंशी ने आवेदन लेने से साफ इनकार कर दिया। दूरभाष पर थाना प्रभारी से संपर्क करने पर उन्होंने इसे जमीन का मामला बताकर अंचल अधिकारी के पास जाने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया।
थाने से निराश होकर पीड़ित ने अंततः भारतीय पोस्टल ऑर्डर के माध्यम से डाक द्वारा थाना को प्राथमिकी के लिए आवेदन भेजा है। संघ ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
सैकड़ों महिला-पुरुषों ने किया प्रदर्शन, कंपनी घेराव की चेतावनी
कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर झारखंड श्रमिक संघ (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव शैलेंद्र मैथी के नेतृत्व में सोमवार को सैकड़ों महिला-पुरुषों ने नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में चांडिल प्रखंड कार्यालय पहुंचकर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए शैलेंद्र मैथी ने कहा, “हम लोगों ने आंदोलन को थाम कर रखा था, क्योंकि झारखंड पर आफत थी। कोविड काल में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हमने विभिन्न राज्यों से मजदूरों को वापस लाया। लेकिन इस क्षेत्र में नहीं, पूरे कोल्हान और झारखंड में पूंजीपति, उद्योगपति गलत एग्रीमेंट से आदिवासी की जमीन की खरीद-बिक्री करवा रहे हैं और बड़ा घोटाला चल रहा है। चांडिल क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन पर उद्योग नहीं लग सकता, फिर भी जय मंगला का अधिग्रहण गलत ढंग से हो रहा है। मैंने खुद आकर सीओ साहब को बताया। 16 अक्टूबर को लिखित दिया, डीसी, एसपी, एसडीओ, थाना प्रभारी सबको दिया, लेकिन FIR तक नहीं लिया गया। यह सरकारी तंत्र झारखंड सरकार को बदनाम करने के लिए बैठा है। आदिवासी की जमीन हड़पो, उद्योग लगाओ, आदिवासी को विस्थापित करो। आज हम ज्ञापन देंगे, अगर 7 से 15 दिन के अंदर कार्रवाई नहीं हुई तो जय मंगला कंपनी के चारों तरफ हम लोग लेट जाएंगे और जब तक फैसला नहीं होगा, कंपनी को घेरे रहेंगे।”
वहीं पीड़ित परिवार के सदस्य रीजू माझी ने कहा, “मैं कुरली गांव का निवासी हूं। मेरे परिवार की जमीन को जय मंगला कंपनी ने अवैध तरीके से हड़प कर बाउंड्री लगा दी है। हमने 16 अक्टूबर को सभी अधिकारियों को शिकायत दी और 3 दिन का अल्टीमेटम दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 21 को जब FIR करने गए तो मुंशी ने बदसलूकी की और FIR लेने से इनकार कर दिया। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जांच नहीं हुई तो इससे भी बड़ा आंदोलन होगा, हम कंपनी में ताला लगाकर हुड़का जाम कर देंगे। यह जमीन बचाओ उलगुलान होगा।”
संघ की मांग
झारखंड श्रमिक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। यदि कंपनी प्रबंधक द्वारा अनुसूचित जनजाति अधिनियम (CNT/SPT Act) का उल्लंघन कर जमीन हड़पने का प्रयास किया गया है तो नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित और क्षेत्र के अन्य रैयतों की जमीन सुरक्षित रह सके।
फिलहाल इस पूरे मामले पर कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस अवसर पर प्रफुल सिंह मुंडा, सुधाकर गोप, रिजु माझी, सुख लाल माझी, खुदीराम मुंडा, सागर सोरेन, श्री राम माझी, गौर हांसदा, मैथा लाल कर्मकार, बाबलु सिंह सरदार, सनातन मुंडा, शिवू सोरेन, दिलीप प्रमाणिक, राम हांसदा, सुखराम टुडू, पतिराम माझी, संजीव टुडू, बलराम माझी, रूपचांद कालिंदी सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे।

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