Nimdih driving license shivir ka aayojan.
अभिजीत गोराई, चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड में वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) शंकराचार्य सामद के नेतृत्व में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को नीमडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में एक विशेष ड्राइविंग लाइसेंस शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के आवेदकों को जिला मुख्यालय के चक्कर काटने से बचाना और एक ही स्थान पर लाइसेंस प्रक्रिया को पूरा कराना था।
शिविर में कुल 30 आवेदकों ने अपना पंजीकरण कराया था, जिसमें 28 पुरुष और 2 महिला आवेदक शामिल थीं। सुबह से ही प्रखंड कार्यालय परिसर में आवेदकों की भीड़ देखी गई। सभी आवेदक अपने वाहनों के साथ निर्धारित समय पर पहुंचे थे।
कड़ी परीक्षा, पारदर्शी प्रक्रिया
जिला परिवहन विभाग की टीम ने पूरी पारदर्शिता के साथ आवेदकों का ड्राइविंग परीक्षण लिया। दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग ट्रैक बनाया गया था। आवेदकों के ट्रैफिक नियमों के ज्ञान, वाहन पर नियंत्रण, ब्रेकिंग सिस्टम और सड़क पर वाहन चलाने के तरीके को परखा गया।
DTO शंकराचार्य सामद स्वयं प्रत्येक आवेदक के परीक्षण पर नजर बनाए हुए थे। उन्होंने आवेदकों को सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाइसेंस सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
परीक्षण समाप्त होने के बाद कुल 22 आवेदकों को सफल घोषित किया गया। सफल होने वालों में 20 पुरुष और सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल दोनों महिला आवेदक भी सफल रहीं। दोनों महिलाओं ने उत्कृष्ट तरीके से वाहन चलाकर अपनी योग्यता साबित की। इससे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश गया है।
7 असफल, 1 अनुपस्थित
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 7 आवेदक निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सके, जिस कारण उन्हें असफल घोषित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि असफल रहे आवेदकों को दोबारा तैयारी करके अगले शिविर में आने की सलाह दी गई है। वहीं, एक आवेदक शिविर में अनुपस्थित रहा। राहत की बात यह रही कि किसी भी आवेदक का फॉर्म या दस्तावेज अपूर्ण नहीं पाया गया।
स्थानीय लोगों में खुशी, शिविर की सराहना
नीमडीह जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का शिविर लगने से स्थानीय लोगों में काफी खुशी है। आमतौर पर लाइसेंस के लिए लोगों को सरायकेला या जमशेदपुर जाना पड़ता था, जिसमें समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। प्रखंड स्तर पर शिविर लगने से लोगों को घर के पास ही सुविधा मिल गई।
सफल होने वाले आवेदकों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग का आभार जताया। महिला आवेदकों ने कहा कि उन्हें लगा था कि प्रक्रिया कठिन होगी, लेकिन अधिकारियों के सहयोग से सब कुछ आसानी से हो गया।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि भविष्य में भी जिले के अलग-अलग प्रखंडों में इसी तरह के शिविर लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके और बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर रोक लगाई जा सके।
निष्कर्ष: कुल मिलाकर 30 में से 22 आवेदकों की सफलता दर 73% से अधिक रही, जो इस शिविर को उत्साहजनक बनाती है।

Janta Ki Awaaz Live Jharkhand ki News web site hai
