Jhimri Ravan Dahan Harelal Mahato – Sona Dungri Maidan me Ravan Dahan dekhne umda jansailab.
बोले- मेरे राजनीतिक भविष्य की चिंता मुझे कम, विरोधियों को ज्यादा – श्रीराम के आदर्श अपनाने से ही होगा अहंकार और अधर्म का अंत
नीमडीह/झिमड़ी: बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश, आस्था का उत्साह और झूमर की सांस्कृतिक छटा। शुक्रवार को नीमडीह प्रखंड के झिमड़ी स्थित ऐतिहासिक सोना डूंगरी मैदान में आयोजित रावण दहन सह सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही भव्य नजारा देखने को मिला। न्यू आदर्श बॉयज क्लब, झिमड़ी के तत्वावधान में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दशहरा मेले का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।

दोपहर से ही सोना डूंगरी मैदान में आसपास के गांवों – झिमड़ी, नीमडीह, कुकडू, तिरुलडीह, जोनाहातु समेत सरायकेला-खरसावां और पुरुलिया सीमा से सटे क्षेत्रों से लोग परिवार सहित पहुंचने लगे थे। मेला परिसर में झूले, चाट-गुपचुप के स्टॉल और खिलौनों की दुकानों पर बच्चों की चहल-पहल देखते ही बन रही थी। शाम होते-होते पूरा मैदान जनसैलाब में तब्दील हो गया।
कार्यक्रम में भाजपा नेता और क्षेत्र के कद्दावर चेहरे हरेलाल महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विधिवत झूमर संगीत सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।
शहीद रघुनाथ महतो को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीद रघुनाथ महतो को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। हरेलाल महतो समेत उपस्थित सभी अतिथियों ने शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया और उनके बलिदान को याद किया। मेला समिति के सदस्यों ने बताया कि शहीद रघुनाथ महतो की धरती पर इस मेले की परंपरा दशकों पुरानी है और इसे सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
रावण दहन से पहले अपने भीतर के अहंकार को मारें – हरेलाल महतो
सभा को संबोधित करते हुए हरेलाल महतो ने रावण दहन की परंपरा को आत्ममंथन से जोड़ते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि सिर्फ लकड़ी और कागज के बने रावण के पुतले को जलाना ही काफी नहीं है। असली विजयादशमी तब होगी, जब हम समाज और स्वयं के भीतर मौजूद बुराइयों को पहचान कर उसे खत्म करेंगे।
उन्होंने कहा, “विजयादशमी पर रावण दहन करने वाले कुछ लोग खुद को प्रभु श्रीराम समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि हम सभी साधारण इंसान हैं और प्रभु श्रीराम के चरणों की धूल के बराबर भी नहीं हैं। पहले अपने भीतर के अहंकार को मारना होगा।”
हरेलाल महतो ने आगे कहा कि जब अहंकार इंसान के मस्तिष्क पर हावी हो जाता है, तो वह अपनी कमियों को देखना तक भूल जाता है। यही अहंकार धीरे-धीरे मनुष्य के चरित्र को रावण जैसा बना देता है। यदि लोग प्रभु श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और जीवन मूल्यों को आत्मसात कर लें, तो बुराई और अधर्म के अंत के लिए केवल प्रतीकात्मक रावण दहन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके इस संदेश पर मैदान में मौजूद लोगों ने तालियों से समर्थन किया।
राजनीतिक भविष्य पर विरोधियों पर किया तंज
धार्मिक और सामाजिक संदेश के बीच हरेलाल महतो ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा, “मैं चुनाव हारूं या जीतूं और आगे मेरा राजनीतिक भविष्य क्या होगा, इसकी चिंता मुझे जितनी नहीं है, उससे कहीं ज्यादा मेरे विरोधियों को रहती है।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इधर-उधर की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम और समाज के हितों पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा, “जब तक मैं जीवित रहूंगा, इस माटी के सम्मान के लिए संघर्ष करता रहूंगा और गरीब एवं दुखी परिवारों की सेवा में दिन-रात जुटा रहूंगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन के बीच स्थानीय राजनीति की चर्चा भी तेज हो गई।
इसके बाद देर शाम जैसे ही रावण के विशाल पुतले में आग लगाई गई, पूरा मैदान ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। आतिशबाजी के बीच रावण दहन देखते ही लोगों में उत्साह भर गया। बाद में झूमर कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मेला समिति अध्यक्ष गणेश चंद्र महतो और उनकी टीम की अहम भूमिका रही।
इस अवसर पर भाजपा जिला महामंत्री डॉ. भूषण मुर्मू, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष मनोरंजन महतो, जिला महामंत्री आकाश महतो, भाजपा नेता प्रो. रविशंकर मौर्या, झिमड़ी की मुखिया सरस्वती सिंह मुंडा, उपमुखिया विजय महतो, पंचायत समिति सदस्य पद्मलोचन महतो, नीमडीह के पूर्व मंडल अध्यक्ष नारायण गोप, कुकड़ू के पूर्व मंडल अध्यक्ष भरत महतो, भाजपा नेत्री अन्नपूर्णा महतो, ग्राम प्रधान अश्विनी महतो समेत अनेक जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता और हजारों ग्रामीण मौजूद रहे।

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