ताजा खबरों के लिए हमें फॉलो करें

Facebook Page Follow करें
BREAKINGHarelal Mahato Deep Vitaran Khunti - खूंटी गांव में दीपों का वितरण | Purulia Hindu Muslim Ekta Mandir - 500 साल से एक ही मंदिर में मां भद्रकाली और सत्य पीर बाबा की पूजा | दीपावली पर ध्वनि प्रदूषण रोकने को सक्रिय हुई पुलिस, अस्पतालों के पास पटाखे नहीं फोड़ने की अपील | बांदना पर्व की आहट से गुलजार हुआ रघुनाथपुर हाट, खरीदारी को उमड़ी भीड़ | आदिवासी नेत्री निशा भगत का निधन, फेसबुक लाइव वीडियो वायरल - जमीन माफिया पर लगाए आरोप | महंगाई पर भारी पड़ा धनतेरस का उत्साह, चांडिल बाजार में जमकर हुई खरीदारी; पप्पू वर्मा ने दी दीपावली की शुभकामनाएं | दलमा इको-सेंसिटिव जोन के तराई में सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, तुलिन ग्रामसभा ने जताई नाराजगी; पूजा स्थल स्थानांतरित करने का हुआ फैसला | पुरुलिया में BJMTUC की नई जिला कमेटी घोषित, विश्वजीत दे बने अध्यक्ष, 40 पदाधिकारियों के नामों का ऐलान |

117 एकड़ जमीन के बदले नहीं मिला रोजगार, हक की मांग को लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे विस्थापित

सरायकेला खरसावां: सरायकेला-खरसावां जिले में विस्थापन और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। गम्हरिया प्रखंड के दुग्धा पंचायत अंतर्गत पांच मौजा के विस्थापित ग्रामीण सोमवार को अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और जनता दरबार में ज्ञापन सौंपा।

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों का आरोप है कि वल्लभ स्टील की स्थापना के समय कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच एकरारनामा हुआ था। एकरारनामे के तहत जमीन के बदले नौकरी, उचित मुआवजा और क्षेत्र के विकास का वादा किया गया था।

कंपनी का अधिग्रहण होने के बाद वल्लभ स्टील अब टाटा स्टील के अधीन संचालित हो रही है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद विस्थापित परिवारों को रोजगार का लाभ नहीं मिल पाया है।

117 एकड़ जमीन की कुर्बानी, मिला सिर्फ आश्वासन

विस्थापितों का कहना है कि कंपनी की स्थापना के लिए उन्होंने करीब 117 एकड़ जमीन की कुर्बानी दी, लेकिन बदले में उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। रोजगार के अभाव में कई जमीनदाता परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गांव के शिक्षित युवा भी नौकरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार समय पर इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं।

न्यायालय जाने की चेतावनी

इस दौरान झारखंड आंदोलनकारी हरमोहन महतो भी विस्थापितों के समर्थन में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, विस्थापन और पलायन झारखंड की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। अगर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण अपने हक के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

अब देखना होगा कि वर्षों से अपने हक की मांग कर रहे इन विस्थापित परिवारों की आवाज प्रशासन और कंपनी प्रबंधन तक कब पहुंचती है और उन्हें उनका अधिकार कब मिलता है।

🟢 WhatsApp Share
Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top