Nimdih Seraikela fasal barbad* – Seraikela-Kharsawan jile ke Nimdih prakhand me in dino kisano par musibaton ka pahad toot pada hai. Bangal ki khadi me bane Arnab Cyclone ke asar se…
निमडीह (सरायकेला-खरसावां), झारखंड | जनता की आवाज लाइव
सरायकेला-खरसावां जिले के निमडीह प्रखंड में इन दिनों किसानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। बंगाल की खाड़ी में बने गंभीर चक्रवाती तूफान *अरनब साइक्लोन* के असर से निमडीह क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार आफत की बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। इसी कारण सैकड़ों एकड़ में लगी पकी हुई धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
मौसम विभाग ने झारखंड के 9 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें सरायकेला-खरसावां जिला भी शामिल है। अरनब साइक्लोन के कारण हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवा से खेतों में पानी भर गया है और कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई है। जनता की आवाज लाइव को मिली तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पूरा खेत बिछ गया है और सुनहरी दिखने वाली फसल पानी में डूब कर काली पड़ने लगी है।
तेज हवा ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल
किसानों ने बताया कि सिर्फ बारिश ही नहीं, 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवा ने फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। हवा के साथ बारिश होने से धान का पौधा जड़ से ही गिर गया है। खेत में पानी भरा होने से फसल सड़ने लगी है।
चार महीने की मेहनत दो दिन में खत्म
निमडीह के किसानों ने बताया कि एक बीघा धान की खेती में दस से बारह हजार रुपये का खर्च आता है। खाद, बीज, दवाई और डीजल के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं। किसानों ने सोचा था कि इस बार फसल बेच कर कर्ज चुकाएंगे, लेकिन अरनब साइक्लोन ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
एक किसान ने बताया कि गिरा हुआ धान काटना बहुत मुश्किल है। सीधी फसल एक दिन में कटती है तो गिरी हुई फसल को काटने में तीन दिन लग रहे हैं और मजदूर भी दोगुनी मजदूरी मांग रहे हैं। पानी में डूबे रहने से बाली में अंकुर निकलने और फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है।
निमडीह को सरायकेला का धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अरनब साइक्लोन जैसी आपदा हर साल यहां के किसानों को बर्बाद कर देती है।
कृषि विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसे फसल का गिरना कहा जाता है। जब धान में बाली आती है तो पौधा ऊपर से भारी हो जाता है। तेज हवा और खेत में ज्यादा नमी होने से जड़ कमजोर पड़ जाती है और पूरा पौधा गिर जाता है। एक बार गिरने के बाद धूप न लगने से दाने काले पड़ जाते हैं और बाजार में उसका दाम आधा रह जाता है।
किसान क्या करें
जनता की आवाज लाइव सभी पीड़ित किसानों से अपील करता है कि वे घबराएं नहीं और ये तीन काम तुरंत करें –
पहला – सबूत रखें, अपने बर्बाद खेत की चारों तरफ से पांच फोटो और एक वीडियो बनाएं, मोबाइल में लोकेशन चालू रखें।
दूसरा – तुरंत सूचना दें, अपने पंचायत के जनसेवक और किसान मित्र को जानकारी दें। निमडीह प्रखंड के कृषि पदाधिकारी को आवेदन दें। किसान कॉल सेंटर नंबर 155261 पर कॉल करके सूचना दर्ज कराएं।
तीसरा – मुआवजे के लिए आवेदन करें, झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना और फसल राहत योजना के तहत मुआवजा मिलता है। अरनब साइक्लोन से हुए नुकसान के लिए विशेष सर्वे का प्रावधान है। इसके लिए खेसरा नंबर, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की कॉपी के साथ प्रखंड कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा।
प्रशासन से मांग
जनता की आवाज लाइव, सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त और जिला कृषि पदाधिकारी से मांग करता है कि अरनब साइक्लोन से निमडीह क्षेत्र में तेज हवा और बारिश से हुए फसल नुकसान का तुरंत टीम भेज कर सर्वेक्षण कराया जाए और किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

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