Sini Mor Birsa Munda pratima
भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा निर्माण में देरी, महीनों बाद भी प्रशासन मौन; खर्च उठाने आगे आए स्थानीय लोग
सरायकेला: सरायकेला-कांड्रा मुख्य मार्ग स्थित सिनी मोड़ पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा महीनों से क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक इसकी सुध नहीं ली है। एक अनियंत्रित वाहन द्वारा वर्षों पुरानी इस प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिए जाने के बाद मुंडा समुदाय और स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि प्रशासन की उदासीनता से नाराज स्थानीय लोग खुद ही चंदा इकट्ठा कर भगवान बिरसा मुंडा की नई प्रतिमा का निर्माण कराने को मजबूर हो गए हैं। यह घटना न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि झारखंड के महान सपूत के प्रति सम्मान को लेकर भी कई सवाल पैदा करती है।
कैसे टूटी थी प्रतिमा?
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ महीने पहले एक अनियंत्रित तेज रफ्तार वाहन ने सिनी मोड़ पर स्थापित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को जोरदार टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रतिमा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और उसका कई हिस्सा टूटकर बिखर गया। यह प्रतिमा वर्षों पहले स्थानीय लोगों के सहयोग से स्थापित की गई थी और सिनी मोड़ की पहचान बन चुकी थी। आने-जाने वाले लोग इस प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते थे।
प्रतिमा टूटने के बाद क्या हुआ?
प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के तुरंत बाद मुंडा समाज के लोगों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। समाज के प्रमुख लोगों ने सरायकेला अंचल कार्यालय, प्रखंड कार्यालय और जिले के कई जनप्रतिनिधियों से मिलकर प्रतिमा के पुनर्निर्माण की मांग की। हर जगह उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला कि जल्द ही नई प्रतिमा स्थापित कर दी जाएगी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया।
प्रशासन की उदासीनता पर लोगों में आक्रोश
प्रशासन की इस उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को बड़े धूमधाम से मनाती है, उनकी योजनाओं के नाम पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करती है, वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृह जिले में उनकी टूटी हुई प्रतिमा को लेकर कोई सुध नहीं ली जा रही है।
स्थानीय समाजसेवी सूरज मुखी ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उलगुलान किया था। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन बलिदान कर दिया। झारखंड के इस महान स्वतंत्रता सेनानी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। फिर भी महीनों से उनकी टूटी पड़ी प्रतिमा का पुनर्निर्माण नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।”
आखिर क्यों मौन हैं जनप्रतिनिधि?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब झारखंड में जगह-जगह महापुरुषों और प्रमुख नेताओं की नई प्रतिमाएं स्थापित करने की होड़ लगी है, तो सिनी मोड़ पर टूटी पड़ी भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या इस ऐतिहासिक महापुरुष की प्रतिमा के पुनर्निर्माण के लिए किसी बड़े आंदोलन का इंतजार किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों ने पूछा है कि क्या प्रशासन चाहता है कि लोग सड़क जाम करें, आंदोलन करें, तब जाकर उनकी नींद टूटेगी? आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में भगवान बिरसा मुंडा आस्था के प्रतीक हैं, और उनकी प्रतिमा का इस तरह उपेक्षित पड़ा रहना लोगों की भावनाओं को आहत कर रहा है।
अब स्थानीय लोग खुद उठा रहे हैं खर्च
जब प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली तो अब स्थानीय लोगों ने खुद ही पहल की है। मुंडा समुदाय के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। जल्द ही नई प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इस नेक कार्य में दिवाकर सरदार, रंजीत सरदार, रामू सरदार, हरा सरदार, समाज सेवी सूरज मुखी, मुकेश पांडा, त्रिलोचन प्रमाणिक सहित कई अन्य लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। लोगों ने कहा है कि वे अपने महापुरुष का अपमान और बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर प्रशासन नहीं करता है तो समाज खुद अपनी धरोहर की रक्षा करेगा।
मांग: जल्द हो प्रतिमा का अनावरण
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भले ही खर्च वे खुद उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन कम से कम इस पुनर्निर्माण कार्य में सहयोग करे और प्रतिमा स्थापित होने के बाद उसके सौंदर्यीकरण और रखरखाव की जिम्मेदारी ले। साथ ही उस अनियंत्रित वाहन चालक पर भी कार्रवाई हो जिसने इस ऐतिहासिक प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया था।
रिपोर्ट: दिनेश मुदी,सरायकेला

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